March 5, 2024

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Sawan 2021: सावन कब से शुरू है? जान लें भगवान शिव की संपूर्ण पूजा विधि और सावन मास के व्रत नियम

Sawan 2021

Sawan- Sāwaṇ or Sāuṇ is the fifth month in the Nanakshahi calendar. Many Indian calendars started in different eras such as Shaka Calendar traditional Vikrama as well as the Nanakshahi calendar which governs the activities within Sikhism.

Sawan 2021: हिंदू धर्म में सावन मास का विशेष महत्व है। यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस साल सावन 25 जुलाई से शुरू हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने भक्त की मनोकामना पूरी होती है। इसके साथ ही सावन के सोमवार व्रत रखने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

सावन मास का महत्व-
शास्त्रों में भी सावन मास के महत्व का जिक्र मिलता है। कहा जाता है कि इस महीने में भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही सोमवार के व्रत का फल शीघ्र मिलता है। सावन मास में भगवान शंकर की पूजा से विवाह आदि में आ रही अड़चनें दूर होने की मान्यता है। अगर आप भी इस साल सावन में भगवान शिव को पूजा-अर्चना कर प्रसन्न करना चाहते हैं तो, जानिए पूजा विधि व व्रत नियम-

सावन माह में भगवान शिव की पूजा विधि-

  • सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  • सभी देवी- देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करें।
  • शिवलिंग में गंगा जल और दूध चढ़ाएं।
  • भगवान शिव को पुष्प अर्पित करें।
  • भगवान शिव को बेल पत्र अर्पित करें।
  • भगवान शिव की आरती करें और भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। 
  • भगवान शिव का अधिक से अधिक ध्यान करें।

सावन मास व्रत नियम-

  • मान्यता है कि सावन महीने में मास-मंदिरा का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
  • इस महीने वाद-विवाद से भी बचना चाहिए। घर-परिवार में स्नेह बना रहना चाहिए।
  • सावन महीने में लहसुन और प्याज के सेवन करने की मनाही होती है।
  • इसके अलावा मसूर की दाल, मूली, बैंगन आदि के सेवन की भी मनाही होती है। शास्त्रों में बासी और जले हुए खाने को तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा गया है।
  • शास्त्रों के अनुसार, सोमवार का व्रत बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। अगर आप व्रत रखने में असमर्थ हैं तो भगवान शिव से माफी मांग कर ना करें।

यह आलेख धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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