IAS Success Story: कलेक्टर का जलवा देख बनाया लक्ष्य, दूसरी बार में मिल गई यूपीएससी 5वीं रैंक

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यूपीएससी में सफल होना आसान नहीं है। इसके लिए सालों मेहनत करनी पड़ती है। मैं रोजाना 10 घंटे पढ़ाई करता था। 

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आइएएस अफसर बनना मेरा लक्ष्य था। युवाओं को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। यह बात यूपीएससी में 5वीं रैंक हासिल करने वाले शहर के उत्कर्ष द्विवेदी ने पत्रिका से चर्चा में कही। 

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उन्होंने कहा कि मैं दो बार असफल रहा, लेकिन हौसला बनाए रखा। ज्यादा मेहनत की और सफल हुआ। 

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मुझे हमेशा माता-पिता का साथ मिलता रहा। मैंने मैकेनिकल इंजीनियर की पढ़ाई की है।

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उत्कर्ष ने बताया कि सफल होने के लिए आध्यात्मिक होना जरूरी है। मेडिटेशन करना चाहिए। मैं रोज मेडिटेशन करता था। इससे पढ़ाई में काफी मदद मिली। 

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सरल जीवन जीने के साथ अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर मेहनत करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए। 

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उत्कर्ष द्विवेदी इंदौर के एबी रोड़ स्थित शालीमार टाउनशिप में रहते हैं. वो मूल रूप से लखनऊ के निवासी हैं.

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उन्होंने कहा कि समाज में बाल मजदूरी गंभीर समस्या है। मैं भविष्य में बाल मजदूरी खत्म करने के लिए कार्य करूंगा,

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क्योंकि इससे बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पाती है और वे पिछड़ जाते हैं। मैं चाहता हूं कि हर बच्चा अच्छे से पढ़े और

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देश की सेवा करते हुए परिवार का नाम रोशन करे। माता-पिता को बच्चों को प्रेरित करना चाहिए।

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उत्कर्ष जब 6वीं क्लास में थे, तब उनके नाना-नानी के घर जाते रहते थे। उस वक्त जब नाना व नानी जिस विभाग में काम करते थे, 

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वहां पर डीएम निरीक्षण करने आया करते थे। यह देख उनकी नानी ने उत्कर्ष से कहा था कि 

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तुम्हे आगे चलकर ऐसा ही बड़ा आफिसर बनना है। तब उत्कर्ष ने लक्ष्य तय कर लिया था।

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