बिरजू महाराज अलविदा: जिस अस्पताल में जन्मे उस दिन 'बृज मोहन' को छोड़ सब लड़कियां पैदा हुईं

फोटोज साभार - इंस्टाग्राम

पिता अच्छन महाराज को अपनी गोद में महज तीन साल की उम्र में ही बिरजू की प्रतिभा दिखने लगी थी। 

फोटोज साभार - इंस्टाग्राम

इसी को देखते हुए पिता ने बचपन से ही अपने यशस्वी पुत्र को कला दीक्षा देनी शुरू कर दी।

फोटोज साभार - इंस्टाग्राम

कथक सम्राट बिरजू महाराज का निधन संगीत जगत के लिए बड़ी क्षति है। कथक के पर्याय रहे बिरजू महाराज देश के प्रसिद्ध शास्त्रीय नर्तक थे।

फोटोज साभार - इंस्टाग्राम

वे भारतीय नृत्य की कथक शैली के आचार्य और लखनऊ के 'कालका-बिंदादीन' घराने के प्रमुख थे। उनके जन्म से लेकर मृत्यु तक की कहानी काफी रोचक है। आइये पढ़ते हैं:-

फोटोज साभार - इंस्टाग्राम

बिरजू महाराज का जन्म 4 फरवरी 1938 को लखनऊ के 'कालका-बिन्दादीन घराने' में हुआ था। बिरजू महाराज का नाम पहले दुखहरण रखा गया था। 

फोटोज साभार - इंस्टाग्राम

यह बाद  में बदल कर 'बृजमोहन नाथ मिश्रा' हुआ। इनके पिता का नाम जगन्नाथ महाराज था, जो 'लखनऊ घराने' से थे 

फोटोज साभार - इंस्टाग्राम

और वे अच्छन महाराज के नाम से जाने जाते थे। बिरजू महाराज जिस अस्पताल में पैदा हुए, उस दिन वहां उनके अलावा बाकी सब लड़कियों का जन्म हुआ था,

फोटोज साभार - इंस्टाग्राम

इसी वजह से उनका नाम बृजमोहन रख दिया गया। जो आगे चलकर 'बिरजू' और फिर 'बिरजू महाराज' हो गया।

फोटोज साभार - इंस्टाग्राम

इस तरह की वेब स्टोरी देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लीक करे -