भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा जीते गए पहले वर्ल्ड कप की कहानी सुनाती फिल्म 83 इस शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।

कपिल देव और टीम को उस दौर में किन चुनौतियों से गुजरना पड़ा और भारत के पहली बार वर्ल्ड कप जीतने के बाद देश में कैसा माहौल था, यह सब देखने को मिलेगा।

फिल्म को देखते हुए काफी हद तक ऐसा फील आता है जैसे आप किसी स्टेडियम में बैठे हुए हैं आपके सामने एक दिलचस्प मैच चल रहा है। 

मैच जिस पर आपके देश की आन-बान निर्भर करती है। हर छक्के और हर चौके पर आप खुद को शोर मचाने और टीम इंडिया को चीयर्स करने से शायद ही रोक पाएंगे। 

 160 मिनट की इस फिल्म के दौरान आपको कहीं भी कलाकार नहीं नजर आते। आपको नजर आते हैं तो सिर्फ खिलाड़ी।

रणवीर सिंह ने कपिल देव के किरदार में खुद को इस कदर ढाल लिया है कि आपके लिए फर्क करना मुश्किल हो जाता है। 

चाल-ढाल से लेकर बात करने के अंदाज तक और नटराज शॉट से लेकर उनके बॉलिंग एक्शन तक रणवीर ने सब कुछ कॉपी कर डाला है।

पंजाबी और टूटी-फूटी अंग्रेजी पर उनकी पकड़ वैसी ही है जैसी कि आप कपिल देव को लेकर कल्पना कर सकते हैं। जैसा कि आप सोच सकते हैं कि कपिल देव ने उस वक्त ये बात कैसे कही होगी?

कहना होगा कि हर एक्टर ने अपना काम बखूबी किया है। खास तौर पर साकिब सलीम ने जिस तरह मोहिंदर जिमी अमरनाथ की भूमिका निभाई है वो कमाल है।

 सुनील गावस्कर के रूप में ताहिर राज भसीन, यशपाल शर्मा के रूप में जतिन सरना, श्रीकांत के रूप में तमिल अभिनेता जीवा, बलविंदर संधू के रूप में एम्मी विर्क और मदन लाल के रूप में हार्डी संधू ने अपने किरदारों के पकड़े रखा है।

पंकज त्रिपाठी ने टीम मैनेजर पीआर मान सिंह का किरदार निभाया है जो कि अपने आप में बहुत खास है। 

 ये किरदार न सिर्फ बीच-बीच में हास्य जोड़े रखता है बल्कि जरूरत पड़ने पर किसी ढाल की तरह टीम के साथ खड़ा हो जाता है। 

 83 की कहानी टीम इंडिया के वर्ल्ड कप के सफर, संघर्ष, हार, आंतरिक संघर्ष, व्यक्तिगत नुकसान और सबसे खास बात, जीतने के उनके जुनून को समेटे हुए है।

कबीर खान ने जाहिर तौर पर एक ऐतिहासिक फिल्म बना दी है लेकिन उनके लिए ऐसा करना जरा भी आसान नहीं रहा होगा। 

कहानी को आगे बढ़ाते हुए भी कबीर खान उन बारीकियों को छूने में कामयाब रहे हैं जिन्हें लोगों ने नोटिस नहीं किया था।

फिल्म में दीपिका पादुकोण, कपिल देव की पत्नी रोमी देव की भूमिका में हैं, लेकिन उनके पास स्टैंड पर बैठने, मुस्कुराने या टीम के खेल के आधार पर रोने के अलावा बहुत कम काम है। 

क्रिकेट प्रेमियों के लिए तो ये फिल्म बहुत खास है है लेकिन जो लोग फिल्म नहीं देखते हैं, वो भी इसे एन्जॉय कर सकें इसका मेकर्स ने पूरा ख्याल रखा है।