March 5, 2024

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सियासत: सपा के फैसले से सियासी भंवर में फंसी स्वामी प्रसाद मौर्य और उनकी सांसद बेटी की राजनीतिक विरासत

स्वामी प्रसाद मौर्य

खबर यूपी की सियासत से : सपा ने धर्मेन्द्र यादव को बदायूँ से अपना उम्मीदवार बनाकर सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने दुविधा पैदा कर दी है कि वह अपनी पीढ़ी को आगे बढ़ायें या पार्टी धर्म का पालन करें।

लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर समाजवादी पार्टी ने 16 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इस घोषणा ने स्वामी प्रसाद मौर्य और उनकी सांसद बेटी संघमित्रा मौर्य की सियासी नैया को सियासी भंवर में डाल दिया है। वह अपनी बेटी के राजनीतिक भविष्य के लिए कौन सा रास्ता तय करेंगे?

ये सवाल अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. फिलहाल उनके सामने उनके और उनकी बेटी भाजपा सांसद संघमित्रा के राजनीतिक भविष्य का सवाल खड़ा है.

धर्मेन्द्र यादव को टिकट देने से स्वामी की नैया अटक गई

सियासत के जानकारों का कहना है कि सपा ने धर्मेंद्र यादव को बदायूं से उम्मीदवार बनाकर स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने दुविधा पैदा कर दी है कि वह अपनी पीढ़ी को आगे बढ़ाएं या पार्टी धर्म निभाएं.

बेटी ने पिता के लिए बीजेपी के खिलाफ प्रचार किया

संघमित्रा मौर्य 2019 के आम चुनाव में बीजेपी के टिकट पर पहली बार सांसद बनीं. इस चुनाव में उन्हें जिताने के लिए स्वामी प्रसाद ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी. 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य अचानक बीजेपी छोड़कर सपा में शामिल हो गए. उन्होंने बीजेपी के खिलाफ कुशीनगर से चुनाव भी लड़ा था. उस समय संघमित्रा ने अपनी पार्टी बीजेपी का समर्थन करने के बजाय अपने पिता के पक्ष में प्रचार किया था. स्थानीय स्तर पर इसका काफी विरोध होने के बावजूद बीजेपी ने संघमित्रा को पार्टी से नहीं निकाला. फिलहाल वह बीजेपी में काफी सक्रिय नजर आ रही हैं. भाजपा ने ऐसा क्यों किया ये पार्टी जाने

संघमित्रा को टिकट मिला तो पिता-पुत्री धर्मसंकट में फंस जायेंगे.

अगर बीजेपी एक बार फिर संघमित्रा को बदायूं से टिकट देती है तो वह और धर्मेंद्र यादव आमने-सामने होंगे. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि स्वामी प्रसाद मौर्य क्या करेंगे. क्या वह अपनी बेटी संघमित्रा का समर्थन करेंगे या फिर पार्टी के प्रति अपनी वफादारी साबित करते हुए धर्मेंद्र यादव के पक्ष में प्रचार करेंगे. सनातन धर्म पर स्वामी प्रसाद मौर्य की एक के बाद एक टिप्पणियों से धर्म प्रेमियों में काफी नाराजगी है। जिसका परिणाम उन्हें और उनकी सांसद पुत्री को आने वाले चुनाव में दिखेगा।

धर्मसंकट के लिए स्वामी स्वयं जिम्मेदार हैं

राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, ”स्वामी प्रसाद और उनकी बेटी की राजनीति दुविधाओं से भरी है. इसके लिए काफी हद तक स्वामी प्रसाद मौर्य खुद जिम्मेदार हैं. वैसे वो बीजेपी में कैबिनेट मंत्री थे. लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी छोड़कर पार्टी के लिए बड़ा संकट खड़ा कर दिया. इसमें उनकी बेटी ने भी उनका साथ दिया. उन्होंने अपनी पार्टी छोड़ दी और सपा कार्यकर्ता बन गईं. तब तक तो ठीक था. लेकिन बाद में स्वामी प्रसाद ने सनातन के खिलाफ जो बयान दिये. वह उनके लिए और भी खतरनाक होते जा रहे है. दोनों तरफ के लोग इसे पचा नहीं पा रहे हैं.’

पिछला चुनाव धर्मेंद्र यादव हार गए थे

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2019 में बीजेपी की संघमित्रा मौर्य ने पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के प्रमुख अखिलेश यादव के भाई और एसपी प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव को 30 हजार वोटों से हराया था. जहां बीजेपी को 5 लाख से ज्यादा वोट मिले. जबकि सपा को 4 लाख 91 हजार वोट मिले थे. अब देखिए क्या होता है, भाजपा यदि स्वामी प्रसाद की बेटी को टिकट देती है तो स्वामी प्रसाद क्या करेंगे। वैसे उम्मीद तो यही है कि संघमित्रा का टिकट कटना तय है। बाकि पार्टी क्या करती है ये पटरी जाने

Web Title: Politics: Political legacy of Swami Prasad Maurya and his MP daughter trapped in political whirlpool due to SP’s decision

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