गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर कांटेक्ट नंबर क्या है? | Sugarcane Research Institute Shahjahanpur contact number kya hai?

गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर कांटेक्ट नंबर क्या है? | Sugarcane Research Institute Shahjahanpur contact number kya hai? : इस आर्टिकल में गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर कांटेक्ट नंबर क्या है इस बारे आपको पूरी जानकारी देने की कोशिस करेगे। तो आप इस आर्टिकल को ध्यान से पूरा पढ़े

निदेशक कार्यालय, उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर – 242001

  • फैक्स नं० : 05842-222509
  • फोन नं०: 05842-222509, 222102

  उ0प्र0 गन्ना शोध परिषद

उ0प्र0 गन्ना अनुसंधान परिषद की स्थापना 1912 में तत्कालीन कृषि रसायनज्ञ और बाद में कृषि निदेशक श्री जॉर्ज क्लार्क द्वारा एक अनुसंधान केंद्र के रूप में की गई थी। 1944 में, राज्य सरकार ने गन्ना अनुसंधान के पहले निदेशक, यू.पी. शाहजहांपुर में कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के प्रशासनिक नियंत्रण में। दिसंबर 1976 में, महामहिम राज्यपाल, यू.पी. यू.पी. की स्थापना को मंजूरी देकर प्रसन्नता हुई। अनुसंधान कार्य में तेजी लाने के लिए शाहजहांपुर में गन्ना अनुसंधान परिषद। यूपी की स्थापना के साथ गन्ना अनुसंधान परिषद, राज्य के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्मों के विकास और गन्ना और चीनी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकियों के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं।

गन्ना किसान संस्थान लाल बहादुर शास्त्री लखनऊ पर कार्यरत कार्मिकों की सूची

क्रमांकनामपदनामपताई-मेलफोन नम्बर
1निदेशकलाल बहादुर शास्त्री गन्ना संस्थान उ. प्र. लखनऊ 
2डा0 नवल किशोर कमलउप निदेशकबी. / 1-041ए, जानकीपुरम गार्डेन, लखनऊ +91 9450518022
3श्री राधेश्याम रायसहायक निदेशक प्रशासनमकान संख्या-11/342 विकास नगर, लखनऊ +91 9450656212
4श्री अरुण कुमारविषय विशेषज्ञ +91 9956146512
5श्री कैलाशआशुलिपिकडॉ. खेरा, हरदोई रिंगरोड, पारा, लखनऊ +91 9450252478
6श्री गिरीश चंद्र काण्डपालविद्युत/ ध्वनि नियंत्रकमकान संख्या 4/111 विराट खंड सी गोमतीनगर लखनऊ +91 9450095939
7श्री हरि नरायन तिवारीसिनेमा आपरेटरसी 3/172, विराट खंड, गोमती नगर, लखनऊ +91 9415546898
8श्री अवधेश कुमार पाण्डेयकनिष्ठ सहायक/ टंकक72, पुराना किला नियर सदर, रेलवे क्रासिंग, लखनऊ +91 6389025387
9श्री शैलेष कुमार तिवारीकनिष्ठ सहायक /टंककएल.आई.ज़ी.-96 ऐशबाग सचिवालय कालोनी लखनऊ +91 9451343906
10श्रीमती सन्ध्या देवीकनिष्ठ सहायक/ टंककसी 25/5, पेपरमिल कॉलोनी, निशातगंज, लखनऊ +91 9451532525
11श्रीमती रागिनी शुक्लाकनिष्ठ सहायक/टंकक9/क-6, कैनाल कालोनी कैंट रोड, लखनऊ +91 6389025393
12श्री विष्णु गोपालइलेक्ट्रीशियन कम ट्यूबवेल आपरेटरग्राम चुनौटी, पोस्ट-नेवलगंज, उन्नाव +91 9198612218
13श्री अवधेश कुमारचालकसंस्थान परिसर आवास +91 9794122900
14श्री ध्रुव कुमार सिंहचालक3/166 विनीत खण्ड, गोमती नगर, लखनऊ +91 9451945888
15श्री कालीचरनकहारराजसम्पत्ति आवास-1/1, रमइयाजीपुरम, डालीबाग, लखनऊ +91 7233801282
16श्री शिव कुमारचौकीदाररमईयाजीपुरम, डालीबाग, लखनऊ +91 8756501138
17श्री जैपाल सिंहकहारसंस्थान परिसर आवास +91 995649261
18श्री हवलदार सिंहचपरासीसंस्थान परिसर आवास +91 9044902410
19श्री आनंद सिंहट्रेनिंग अटेण्डेंट  +91 9838575792
20श्री अच्छेलालमालीगन्ना किसान संस्थान आवासीय कालोनी +91 9598439525
21श्री रामकरनफोटोकॉपियर ऑपरेटरग्राम हँसेमउ पोस्ट – पुराना गोमती नगर,चिनहट, लखनऊ +91 9838674594
22श्री कौशलचपरासी264, रहमत नगर पोस्ट- अमेठी, तहसील मोहनलालगंज, लखनऊ +91 8756075005
23श्री प्रवीण कुमार सिंहचौकीदार 
24श्री मनोज कुमारस्वीपरबाबा का पुरवा, खदरा लखनऊ +91 8382033469
25श्री राजेश कुमारस्वीपर14/287 इंदिरा नगर लखनऊ +91 8604584470
26श्रीमती जैसमीन खाँनज्येष्ठ सहायक
27श्री लियाकत अली अंसारीज्येष्ठ सहायकग्राम-शामपुर हतवा पो०-साखोपार जिला-कुशीनगर9450444096
28श्री अनिल कुमारकनिष्ठ सहायक/टंककगोण्डा मुख्यालय —————

गन्ना कैलेण्डर

जनवरी
1आगामी बसंतकालीन गन्ना बुआई हेतु आवश्यक तैयारी करें।
2बसन्तकालीन गन्ना बुवाई हेतु चयनित प्लाट में पोषक तत्वों का स्तर जानने तथा उसके अनुसार खाद एवं उर्वरको का प्रयोग किये जाने हेतु उस प्लाट की मिट्टी जॉच हेतु गन्ना शोध केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्र अथवा अन्य मृदा विश्लेषण प्रयोगशाला में भेज दें।
3संस्तुति किस्म एवं स्वस्थ गन्ना बीज की उपलब्धता हेतु निकटवर्ती शोध केन्द्र के पौधशालाओं/चीनी मिल केमाध्यम से सुरक्षित कर लें। (उत्तर प्रदेश के लिए क्षेत्रवार संस्तुित किस्मों की सूची दी गई हैं)
फरवरी
1बसंतकालीन गन्ने की बुवाईः
2उत्पादन लागत व समय की बचत तथा अच्छे जमाव के लिए डीप फरो कटर-प्लान्टर यंत्र द्वारा बुआई करें।
3अधिक उपज के लिए ट्रेन्च विधि/ भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित ‘‘पेयर्ड-रो’’ बुआई यंत्र द्वारा बुआई करें।
4स्वस्थ एवं ताजा गन्ने के 2 अथवा 3 ऑख के पैड़ों को बीजोपचार हेतु कार्बेन्डाजिम (बाबस्टीन) 112 ग्राम को माध्यम से सुरक्षित कर लें। (उत्तर प्रदेश के लिए क्षेत्रवार संस्तुित किस्मों की सूची दी गई हैं)
5112 ली. पानी (प्रति हे) में घोल कर 5 मिनट तक उपचारित करने के पश्चात बुआई करें।
6बुआई से पहले खेत की तैयारी के समय 10 कि.ग्रा. ट्राइकोड्रमा एवं एसीटोबैक्टर युक्त प्रेसमड/गोबर की खाद (10 टन/हे0) का प्रयोग अवश्य करें। ट्राइकोड्रमा एवं एसीटोबैक्टर कल्चर प्रमाणिक स्रोतों से ही प्राप्त करंे।
7दीमक एवं प्ररोह व जड़ बेधक कीटों से बचाव हेतु नालियों में गन्ने के टुकडे के ऊपर प्रिफोनिल 20 कि.ग्रा. प्रति हे. की दर से अथवा क्लोरपायरीफास 20 ई.सी. 5 ली. 1875 पानी में घोलकर हजारे से पैडो के ऊपर डालकर 2-3 से.मी. मिट्टी से ढ़क देना चाहिये।
8यदि मृदा पी.एच. 7.5 से ज्यादा हो, तो इमीडाक्लोरप्रिड 17.8 एस.एल. 350 मिली0/हे0 का प्रयोग अधिक प्रभावी होता है।
9खर-पतवार के प्रभावी नियंत्रण हेतु संस्तुति शाकनाशियों का प्रयोग गन्ना बुआई पश्चात् अविलंब करें।
10नव रोपित शरदकालीन गन्ने में नत्रजन की पहली ट्रापडेसिंग हेतु 125 कि.ग्रा प्रति हे. की दर से सिंचाई के पश्चात लाइनों में बुरकाव करें।
11शरद कालीन रोपित फसल में मध्य फरवरी में चोटी बेधक कीट की पहली पीढ़ी के प्रौढ़ कीट (सफेद तितली) को नष्ट करने के लिए खेत में फेरोमोन टैªप समान दूरी पर 25 ट्रैप/हे0 लगायें। तितली प्रकट होने के एक सप्ताह बाद पत्तियों के पृष्ठ भाग पर पाये जाने वाले नारंगी-भूरा रंग के अंड समूहों को नष्ट कर दें।
मार्च
1बसंतकालीन गन्ना बुआई
2बसंतकालीन गन्ना बुआई हेतु मार्च माह सर्वोत्तम है। अतः इस माह में बुआई अवश्य पूरी कर लें।
3अपने क्षेत्र के लिए संस्तुित किस्मों की ही बुआई करें। (उत्तर प्रदेश के लिए क्षेत्रवार संस्तुित किस्मों की सूची दी गई हैं)
4नव रोपित शरदकालीन गन्ने में सिंचाइर्, खाद, उर्वरक का प्रयोग एवं गड़ाई करना सुनिश्चित करें।
5गन्ने मंे खरपतवार नियंन्त्रण हेतु कस्सी, फावडे़ या कल्टीवेटर से गुड़ाई करें श्रमिकों के अभाव में रासायनिक नियन्त्रण हेतु मैट्रीब्युजीन (70 प्रतिशत) 500 ग्राम तथा 2-4 डी. (58 प्रतिशत) 2.5 ली. प्रति हे. की दर से 1000 लीटर पानी मेें घोल बनाकर छिड़काव करने से सकरी तथा चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों का नियन्त्रण होता हैं।
6नव रोपित शरदकालीन गन्ने मंे अकुंर बेधक से ग्रसित पौधों को जमीन की सतह से काटकर निकाल दें।
7पेड़ी व नवरोपित शरदकालीन गन्ने में यदि कंडुआ (स्मट) रोग का संक्रमण हो तो ग्रसित पौधों को निकालकर नष्ट करें। रोग ग्रसित गन्ने के चाबुक को पॉलीथीन की थैली से ढककर ही कटाई करें, जिससे रोग के काले रंग का चूर्ण फैल नहीं पाये।
8scsd
अप्रैल
1बसंतकालीन गन्ने के पूर्ण जमाव के पश्चात् यदि पंक्तियों में रिक्त स्थान (60 सें0मी0 से अधिक) हो तो वहाँ 2 या 3 आँख के टुकड़ों द्वारा रिक्त स्थानों की भराई कर दें। इसी समय खेत की गुड़ाई कर दें तथा इसके एक सप्ताह बाद सिंचाई कर दें।
2शरदकालीन गन्ने में बेधक कीटों से बचाव हेतु क्लोरेन्ट्रेनिलिप्रोल (18.5 एस.सी) 375 मि.ली. प्रति हे. की दर से अपै्रल के अन्तिम सप्ताह मंे 1000 ली. पानी में घोल बनाकर गन्ने की जड़ो के पास डेªन्चिंग कर 24 घण्टें के अन्दर सिंचाई कर दें।
3खरपतवार नियन्त्रण हेतु कस्सी, फावडे या कल्टीवेटर से गुड़ाइ करें। श्रमिकांे के अभाव मंे रासायनिक नियन्त्रण हेतु संकरी पत्ती वाले खरपतवारों का नियन्त्रण हेतु मैट्रीब्युजीन (70 डब्लू. पी.) 500 ग्राम तथा चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों हेतु 2-4 डी. (58 प्रतिशत ) 2.5 ली. को 1000 ली. पानी मे मिलाकर छिड़काव करें तथा मोथा घास की अधिक प्रचुरता की स्थिति में हालोसल्फयुरान मिथाइल (75 प्रतिशत) घुलनशील दाना 90 ग्राम तथा मैट्रीब्युजीन (70 डब्लू. पी.) 750 ग्राम प्रति हे. 1000 ली. पानी मंे घोलकर छिड़काव कर दें।
4इसी माह में गन्ने की पेड़ी व बावक फसलों में नत्रजन की एक-तिहाई मात्रा उचित नमी स्तर पर टॉप ड्रेसिंग कर दें।
5सभी बेधक कीटों से बचाव हेतु फेरोमोन टैªप्स लगायें। टैªप्स पेस्ट कन्ट्रोल ऑफ इण्डिया के यहाँ उपलब्ध है।
6इस समय खेतों में सभी रोगों के लक्षण प्रकट होने लगते हैं। अतः खेत का नियमित निरीक्षण अनिवार्य है। रोग ग्रसित पौधों को खेत से निकालकर नष्ट कर दें।
7रोगों के लक्षणः
8कंडुवा (स्मट)ः गन्ने के सिरे पर काली चाबुक जैसी संरचना दिखाई देगी।
9पर्णदाह (लीफ स्कॉल्ड)ः नव-जनित पत्तियों में मध्य शिरा के समांतर सफेद धारियाँ दिखाई देंगी, पत्तियाँ बाद में सूखने लगेंगी।
10घासी प्ररोह (ग्रासी शूट)ः पौधा घास जैसा दिखाई देगा एवं सभी पत्तियाँ सफेद हो जाती है।
11अप्रैल के अंतिम सप्ताह में खेत में पाइरिला दिखाई देने लगेगा। इसके नियंत्रण के लिए निचली पत्तियों के पृष्ठ भाग में धवल सफेद अंड समूह दिखाई देंगे ऐसी पत्तियों को काटकर नष्ट करें।
12इसी माह पेड़ी फसल में काला चिटका (ब्लैक बग) का प्रकोप होता है, जिससे फसल की पत्तियाँ पीली पड़ने लगती है। ऐसी अवस्था में 3 प्रतिशत यूरिया एवं प्रोफेनोफास 40 प्रतिशत $ साइपर 4 प्रतिशत 750 मि.ली./हे. 650 ली. पानी में घोलकर कट नाजिल से छिड़काव करें।
मई
1गन्ने की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें तथा अधिक पानी देने से बचें। प्रत्येक सिंचाई के बाद गुड़ाई करें। नत्रजन की संस्तुत मात्रा से ज्यादा न डालें।
2फसल सुरक्षा हेतु अप्रैल माह में वर्णित कार्यक्रम इस माह में भी अपनायें।
3पेड़ी गन्ने में अधिक व्याँत की अवस्था में गन्ने की पंक्तियों में मिट्टी चढ़ाना आवश्यक है। मिट्टी टैªक्टर चालित यंत्रों से चढ़ाना लाभदायक है।
4चोटी बेधक कीट के नियंत्रण हेतु ट्रैप्स लगायें। यदि सफेद तितलियाँ टैªप्स में आने लगें तो खेत में क्लोरेन्ट्रेनिलिप्रोल 18.5 एस.सी. 375 मि.ली./हे0 कीटनाशक का घोल बनाकर नैपसैक स्प्रेयर से गन्ने की लाइन को ड्रैंन्चिग के उपरान्त सिंचाई करें।
5गन्ने की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें तथा अधिक पानी देने से बचें। प्रत्येक सिंचाई के बाद गुड़ाई करें। नत्रजन की संस्तुत मात्रा से ज्यादा न डालें।
6फसल सुरक्षा हेतु अप्रैल माह में वर्णित कार्यक्रम इस माह में भी अपनायें।
7चोटी बेधक कीट के नियंत्रण हेतु ट्रैप्स लगायें। यदि सफेद तितलियाँ टैªप्स में आने लगें तो खेत में क्लोरेन्ट्रेनिलिप्रोल 18.5 एस.सी. 375 मि.ली./हे0 कीटनाशक का घोल बनाकर नैपसैक स्प्रेयर से गन्ने की लाइन को ड्रैंन्चिग के उपरान्त सिंचाई करें।
जून
1संस्तुत नत्रजन की शेष मात्रा मध्य जून तक उचित नमी पर अवश्य डाल दें। अच्छा होगा यदि नत्रजन गन्ना पौधों के समीप कूड़ों में डालकर मिट्टी चढ़ायें।
2आवश्यकतानुसार सिंचाई एवं गुड़ाई करें। अधिक सिंचाई से बचे।
3पूर्व माह की तरह इस माह में भी रोग व कीट ग्रसित पौधों को काटकर नष्ट कर देें। जिन क्षेत्रों में सफेद गिडार के प्रकोप की आशंका है वहाँ पर प्रौढ कीट (बीटल) के नियंत्रण हेतु सामुदायिक स्तर पर जगह-जगह भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित फेरोमोन युक्त प्रकाश ट्रैप्स लगायें। इस तरह एकत्रित कीटों को नष्ट कर दें। ट्रैप्स की अन-उपलब्धता की दशा में आस-पास के पेड़ों पर बैठे हुए कीटों को झाड़कर एकत्रित कर नष्ट कर दें।
4वर्षा न होने की स्थिति में अथवा सूखे की अवस्था में इथरल 12 मि.ली. को 100 लीटर पानी में घोलकर पत्तियों में छिड़काव करें।
5अगर हरी-खाद फसल की बुआई करनी हो तो जून के अंत में बुआई कर दें।
जुलाई
1इस माह में गन्ने में मिट्टी चढ़ाना अति आवश्यक है।
2इस माह में बेधक कीटों के नियंत्रण हेतु 50,000 ट्राइकोग्रामा अंड युक्त ट्राईकोकार्ड प्रति हे0 लगायें। ये कार्ड टुकड़ों में काटकर पत्तियों की निचली सतह पर नत्थी कर दें। यह प्रक्रिया 10 दिन के अंतराल पर अक्टूबर माह तक जारी रखें।
3इसके अतिरिक्त यदि संभव हो तो कोटेशिया फ्लेविप्स (500 व्यस्क मादा कीट/हे0) एवं आइसोटीमा (125 व्यस्क मादा कीट/हे0) खेतों में बीचों बीच छोड़ दें।
4पायरिला (फुदका) कीट के नियंत्रण के लिए इपीरिकैनिया परजीवी के ककून अथवा अंड समूह जो खतों में उपलब्ध होता है, को समान रूप से खेत में वितरित कर दें ताकि समान रूप से फैल जायें। पहचानः- ककून गोलाकार सफेद रंग के एवं अंड समूह चटाईनुमा काले रंग के होते हैं, ये दोनों पत्तियों के पृष्ठ भाग पर पाये जाते हैं।
5रोग ग्रसित पौधों को खेत से जड़ सहित निकालकर नष्ट कर दें तथा रिक्त हुए स्थान पर ट्राईकोडर्मा का बुरकाव कर दें।
6लाल सड़नः ग्रसित गन्ने की अगोले की तीसरी-चौथी पत्तियाँ एक किनारे अथवा दोनों किनारों से सूखना प्रारम्भ हो जाती हैं, फलस्वरूप धीरे-धीरे पूरा अगोला सूखने लगता है।
7गन्ने में पोक्का बोइंग रोग का प्रकोप इसी माह में देखा जाता है जिसके उपचार हेतु कापरऑक्सीक्लोराइड 0.2 प्रतिशत या बावस्टीन का 0.1 प्रतिशत घोल का 15 दिन के अन्तराल पर दो छिड़काव करें।
अगस्त
1गन्ने की बँधाई कर दें।
2यदि आवश्यक हो तो खेत से पानी निकालने की व्यवस्था करें।
3कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए जुलाई में सुझाए गए कार्यक्रम को दोहरायें।
4अधिक वर्षा के अवस्था में जल निकास की व्यवस्था करें।
5पोक्का बोइंग रोग के लक्षण दिखने पर गत माह की भॉति नियन्त्रण करें।
6जून जुलाई में बोये गये ढैचा फसल को अगस्त के अन्त में पलटाई कर मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करे।
7गन्ने की लाल सड़न रोग के प्रारम्भिक लक्षण जिसमें उपर से तीसरी अथवा चौथी पत्ती सूखना प्रारम्भ होती है, इसी माह में दिखते है। एसे दिखने पर तुरन्त निकटवर्ती गन्ना शोध केन्द्र को सूचित करें।
सितंबर
1गन्ने की सूखी पत्तियाँ निकाल कर लाइनों के बीच में बिछा दें तथा थानों की बँधाई कर दें।
2वर्षा ऋतु में बोई गई हरी खाद को पलटकर मिट्टी में मिला दें।
3यदि आवश्यक हो तो फसल सुरक्षा के लिए जुलाई में सुझाए गए कार्यक्रमों को ही दोहरायें।
4यदि ऊली माह (ऊली एफिड) दिखाई दें तो इसके परजीवी डाइफा कीट के 1000 गिडार/हे0 की दर से खेत में उपयोग करें।
5अधिक पैदावार हेतु ट्रेन्च विधि से गन्ने की बुवाई करें, इसमें ट्रेन्च ओपनर द्वारा 25-30 से.मी. गहरी तथा 30 से.मी. चौडी नाली बनाकर मृदा जॉच अथवा दी गयी खादीय संस्तुति के अनुसार उर्वरकों को नालियों में डालकर गन्नेे के दो ऑख के पैड़ों को दोहरी पंक्ति विधि से इस प्रकार बुवाई करनी चाहिए कि एक मीटर मंे दो ऑख के 10 से 12 पैडें आ जायें।
अक्टूबर
1शरदकालीन गन्ने बुआई की तैयारी करें। संस्तुत प्रजातियों के स्वस्थ बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कर लें। बीज पौधशाला से ही लें। जहाँ तक संभव हो पेड़ी गन्ने का बीज प्रयोग में न लायें।
2बुआई करते समय ट्राईकोडर्मा युक्त प्रेसमड (5 टन/हे.) या गोबर की खाद (10 टन/हे.) का प्रयोग अवश्य करें।
3उर्वरकों की संस्तुित मात्रा से नत्रजन की एक तिहाई मात्रा, पोटाश व फॉस्फोरस की पूरी मात्रा बुआई के समय कूँड़ों में डालें।
4दीमक एवं प्ररोह व जड़ बेधक कीटों से बचाव हेतु नालियों में गन्ने के टुकडे के ऊपर प्रिफोनिल 20 कि.ग्रा. प्रति हे. की दर से अथवा क्लोरपायरीफास 20 ई.सी. 5 ली. 1875 पानी में घोलकर हजारे से पैडो के ऊपर डालकर 2-3 से.मी. मिट्टी से ढ़क देना चाहिये। बुआई के समय दीमक से बचाव हेतु क्लोरफायरीफॉस (6.25 ली0/हे0) का प्रयोग अवश्य करें।
5खड़ी फसल को चूहांे से बचाव हेतु ब्रोमोडाइलान अथवा जिंक फॉस्फाइड दवा को आटे में गोलियाँ बनाकर चूहों के बिलों के पास या समीप रख दें। इस दवा का प्रयोग करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि बिल में चूहे हैं या नहीं। इसके लिए पहले दिन सभी बिल कां मिट्टी द्वारा बंद कर दें। अगले दिन खुले हुए बिलों में चूहा होने की संभावना है। इन्हीं बिलों में दवा मिश्रित गोलियाँ रखें।
6विलम्बित शरदकालीन बावक गन्ने की बुवाई हेतु इस माह में एस.टी.पी. अथवा पॉली बेग विधि से नर्सरी तैयार कल लेना चाहिए।
नवंबर
1शरदकालीन में बोयी गयी गन्ने की फसल के साथ अन्तःफसल की देखभाल एवं आवश्यक सस्य क्रिया करें।
2सप्लाई टिकट गन्ने की परिपक्वता के अनुसार जारी किये जाते हैं, जिसमें सर्वप्रथम शरदकालीन अगेती पेड़ी, सामान्य पेड़ी, अस्वीकृत पेड़ी, शरदकालीन अगेती पौधा, बसन्तकालीन पौधा एवं अस्वीकृत पौधा के क्रम में पर्चियाँ लगी होती हैं, इसलिए जारी पर्चियों के अनुरूप गन्ने की कटाई करें, जिससे पूर्ण परिपक्वता की स्थिति में उपादन अधिक प्राप्त होता है।
3शरदकालीन गन्ने की दो लाइनों के बीच, गेहूँ की दो लाइन की बुवाई कर उपज प्राप्त की जा सकती है।
4देर से काटी गयी धान की फसल के उपरान्त खेत खाली होने पर पूर्व में तैयार पालीबैग/एस.टी.पी. नर्सरी से पौधें को रोपित कर अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती हैं।
5खड़ी फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें।
6मिल में भेजने योग्य गन्ने की कटाई जमीन की सतह से करें।
दिसंबर
1शरदकालीन गन्ना काटने के बाद जिस खेत में पेड़ी रखनी हो गन्ने की ठूँठों के किनारे सर्दी का दुष्प्रभाव रोकने के लिए ताजा प्रेसमड (10 टन/हे.) की दर से ठॅूठों के ऊपर डालकर गुड़ाई करें या इथरल (12 मि.ली./हे.) 1000ली0 पानी में घोल बनाकर छिड़काव एक घण्टा के अंदर अवश्य कर दें अन्यथा प्रभावकारी नहीं होगा।
2पाला प्रभावित क्षेत्रों मेें गन्ने की सभी फसलों में सिंचाई करें।
3बसन्तकालीन गन्ने की कटाई कदापि न करें। अपरिपक्व गन्ने में चीनी परता के साथ-साथ वजन भी कम होता है तथा तापमान कम होने के कारण पेड़ी में फुटाव भी कम होता है।
4चीनी मिल में साफ एवं ताजे गन्ने की आपूर्ति करें।
5शरदकाल में बोयी गयी गन्ने की फसल के साथ अन्तःफसल में सिंचाई के उपरान्त उर्वरक का प्रयोग करें।

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