March 5, 2024

NEWSZON

खबरों का digital अड्डा

बिछने लगी सियासी बिसात: मेरठ सीट पर अब कांग्रेस की मजबूत दावेदारी, बीजेपी-आरएलडी गठबंधन के बाद ये है मास्टर प्लान

मेरठ लोकसभा सीट

मेरठ लोकसभा सीट मेरठ लोकसभा सीट

पश्चिमी यूपी में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है. राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी जीत और हार के समीकरण बनाने में जुट गई हैं. बीजेपी और आरएलडी के गठबंधन के बाद अब मेरठ सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है.

लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने बिसात बिछानी शुरू कर दी है. आरएलडी की एनडीए से नजदीकी के चलते कांग्रेस ने मेरठ लोकसभा सीट पर दावा ठोक दिया है. माना जा रहा है कि किसी चर्चित चेहरे पर दांव खेला जाएगा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अवनीश काजला का कहना है कि मेरठ सीट पर विशेष दावा किया गया है।

1952 से कांग्रेस का दबदबा रहा है
1952 में देश की पहली लोकसभा के चुनाव में मेरठ को तीन लोकसभा क्षेत्रों में विभाजित किया गया था। मेरठ जिला (पश्चिम), मेरठ जिला (दक्षिण), मेरठ जिला (उत्तर पूर्व)। कांग्रेस ने तीनों सीटों पर जीत हासिल की. इनमें मेरठ पश्चिम सीट से खुशीराम शर्मा, मेरठ दक्षिण से कृष्णचंद्र शर्मा और मेरठ उत्तर-पूर्व से शाहनवाज खान यहां से सांसद बने।

1957 में तीनों लोकसभा सीटों को मिलाकर मेरठ लोकसभा सीट का गठन किया गया। इस चुनाव में कांग्रेस ने फिर शाहनवाज खान को मैदान में उतारा. शाहनवाज यहां से लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए. 1962 में शाहनवाज रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार महाराज सिंह भारती को हराकर तीसरी बार सांसद बने।

1967 में कांग्रेस पहली बार हारी
लगातार तीन बार जीत हासिल करने वाली कांग्रेस को पहली बार 1967 में मेरठ सीट पर हार का सामना करना पड़ा. 1967 में कांग्रेस के खिलाफ खड़े हुए सोशलिस्ट पार्टी के एमएस भारती ने शाहनवाज खान को हरा दिया. एक ही उम्मीदवार के दम पर लगातार तीन बार जीत हासिल करने वाली कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका था. एमएस भारती ने शाहनवाज खान को भारी वोटों से हराया. भारती को जहां 146172 वोट मिले, वहीं शाहनवाज 107276 वोटों पर सिमट गए.

1971 में कांग्रेस फिर जीती
चौथे लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद भी, कांग्रेस ने 1971 में शाहनवाज खान को फिर से उसी सीट से मैदान में उतारा। शाहनवाज ने पांचवीं लोकसभा में फिर से जीत हासिल की और कांग्रेस को सत्ता में वापस ला दिया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (संगठन) के उम्मीदवार हरि किशन को भारी मतों के अंतर से हराया। शाहनवाज को 180181 वोट मिले, जबकि हरि किशन को 98382 वोट ही मिले. छठे लोकसभा चुनाव में बीएलडी के कैलाश प्रकाश ने शाहनवाज खान को 124732 वोटों के अंतर से हराया.

मोहसिना किदवई दो बार जीतीं
1980 में कांग्रेस ने मेरठ सीट से नई उम्मीदवार मोहसिना किदवई को मैदान में उतारा. मोहसिना ने कांग्रेस को शाहनवाज की हार से उबरने और जीत दर्ज कराने में मदद की. मोहसिना 1980 और 1984 में लगातार दो बार यहां से सांसद चुनी गईं।

1980 में उन्होंने जनता पार्टी (एस) के उम्मीदवार हरीश पाल को हराया और 1984 में उन्होंने जनता पार्टी की अंबिका सोनी को हराया। 1989 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस ने फिर मोहसिना किदवई को मैदान में उतारा, लेकिन वह हार गईं। 1980 में मोहसिना से हारने वाले हरीश पाल ने इस साल उन्हें हरा दिया. 1991 में बीजेपी ने अमर पाल सिंह को मैदान में उतारा, वो 1991, 1996, 1998 में लगातार तीन बार सांसद चुने गए.

अवतार सिंह भड़ाना ने 1999 में कांग्रेस की वापसी कराई
1999 में, कांग्रेस उम्मीदवार अवतार सिंह भड़ाना ने मेरठ सीट जीती, हालांकि, 2004 के चुनाव में, बहुजन समाज पार्टी के शाहिद अख़लाक़ ने जीत हासिल की। इसके बाद 2009, 2014 और 2019 में लगातार बीजेपी के राजेंद्र अग्रवाल सांसद बने.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *