March 5, 2024

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सियासी बिसात: बीजेपी-आरएलडी गठबंधन का उदय, बसपा सांसद रालोद के संपर्कमें, बिजनौर सीट आरएलडी के खाते में जाना लगभग तय

बीजेपी-आरएलडी गठबंधन

बीजेपी-आरएलडी गठबंधन

बीजेपी-आरएलडी के गठबंधन के बाद दावेदारों के अरमानों पर पानी फिरता नजर आ रहा है. बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष समेत कई दिग्गज बिजनौर सीट पर तैयारी में जुटे थे, वहीं अब यह सीट आरएलडी के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है. इस बीच बसपा सांसद के रालोद से संपर्क करने की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है।

एक तरफ जहां बीजेपी-आरएलडी गठबंधन परवान चढ़ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी से बिजनौर सीट पर टिकट की दावेदारी करने वालों के अरमान डूबते नजर आ रहे हैं. इस सीट पर बीजेपी से प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित बेनीवाल से लेकर सदर विधायक ऐश्वर्या मौसम चौधरी के पति समेत कई नेता टिकट मांग रहे थे. अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि यह सीट आरएलडी के खाते में जाएगी. ऐसे में जहां बीजेपी के दावेदार मुश्किल में हैं. उधर, लोकसभा में कम सीटें मिलने से रालोद दावेदारों में बेचैनी है।

पिछले एक सप्ताह से जिले का राजनीतिक परिदृश्य बदला हुआ है। सबसे ज्यादा असर बिजनौर सीट पर दिख रहा है. जब से भाजपा-रालोद गठबंधन के स्थायी होने की बात चल रही है, तब से दावेदार चिंतित हैं। जनवरी के अंत तक भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित बेनीवाल चांदपुर और बिजनौर लोकसभा में जनसभाएं कर रहे थे। मतदाताओं के बीच जा रहे थे. सदर विधायक के पति ऐश्वर्या मौसम चौधरी भी कई बड़े कार्यक्रम कर चुके हैं.

इनके अलावा पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह भी गांवों का दौरा करने में जुटे रहे. इनके अलावा पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह, कविता चौधरी, राज्य सभा सांसद कांता कर्दम, रामेंद्र सिंह के नाम भी दावेदारों की सूची में चर्चा में थे.

अब जब से नए गठबंधन में बिजनौर सीट आरएलडी के खाते में जाने की बात सामने आई है, ये सभी दावेदार चिंतित नजर आ रहे हैं. इनमें से कई टिकट की दौड़ से बाहर होते दिख रहे हैं, जबकि कुछ ने दूसरी लोकसभा में अपने टिकट की उम्मीद तलाशने के लिए पार्टी के शीर्ष नेताओं से मिलना शुरू कर दिया है.

बाहरी नेता संपर्क में, रालोद दावेदारों में बेचैनी
भाजपा-रालोद गठबंधन और बिजनौर सीट रालोद के खाते में जाने की चर्चाओं से भी यहां के दावेदार परेशान हैं। अब यह तो जल्द ही साफ हो जाएगा कि रालोद को बिजनौर सीट पर किस पर भरोसा है, लेकिन पिछले तीन दिनों से इस बात की चर्चा जोरों पर है कि बिजनौर के वर्तमान बसपा सांसद मलूक नागर रालोद के शीर्ष नेताओं से संपर्क कर रहे हैं।

इसके अलावा बिजनौर के सियासी खेमे में आरएलडी विधायक मदन भैया का नाम भी चर्चा में है. ऐसे में बिजनौर से टिकट की दावेदारी कर रहे डॉ.नीरज चौधरी भी शीर्ष नेताओं से संपर्क कर रहे हैं। इनके अलावा विधायक चंदन चौहान, रालोद के पूर्व जिलाध्यक्ष ब्रजवीर सिंह चौधरी के नाम भी दावेदारों की सूची में हैं।

अब रुचिवीरा को लेकर सपा में चर्चा तेज, कई हैं दावेदार
रालोद के सपा छोड़ने की खबर पक्की है तो सपा से टिकट मांग रहीं पूर्व विधायक रुचिवीरा का नाम आगे बढ़ने लगा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अब पूर्व विधायक रुचिवीरा ही सपा के टिकट पर बिजनौर लोकसभा से चुनाव लड़ सकती हैं। इनके अलावा बिजनौर से सपा से डॉ. रमेश तोमर का नाम भी दावेदारों की सूची में है।

बिजनौर सीट पर दो बार गुर्जर और एक बार जाट उम्मीदवार जीते हैं।
बिजनौर लोकसभा सीट का गठन 2009 में हुआ था। आरएलडी के संजय चौहान, जो गुर्जर समुदाय से थे, ने पहले प्रयास में जीत हासिल की थी। इसके बाद 2014 में इस सीट से जाट समुदाय से बीजेपी के भारतेंद्र सिंह सांसद बने. 2019 के चुनाव में भले ही पार्टी बदल गई हो, लेकिन गुर्जर समुदाय से बीएसपी के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाले मलूक नागर जीत गए. आपको बता दे कि मलूक नागर रालोद छोड़कर ही बसपा में शामिल हुवे थे।

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