March 1, 2024

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Navratri 2022 | नवरात्रि के नौ दिनों में क्यों किया जाता है माँ दुर्गा के नौ स्वरुप का आवाह्न, पढ़े

Navratri 2022

प्रोफेसर शिवानी अग्रवाल, आईआईएमटी विश्वविद्यालय, गंगानगर (मेरठ)

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

Navratri 2022 | नवरात्रि के नौ दिन बहुत ही पावन एवं पवित्र माने जाते हैं। नवरात्रि मानने के पीछे किंवदंती है कि शक्तिशाली राक्षस महिषासुर और देवी दुर्गा के बीच महान युद्ध हुआ, जिसमें देवी दुर्गा के हाथों महिषासुर मारा गया। हर साल, नवरात्रि के प्रत्येक दिन, महिषासुर पर उनकी जीत के दिन और ‘बुराई पर अच्छाई’ की जीत का जश्न मनाने के लिए “देवी दुर्गा” के विभिन्न विभिन्न नो अवतारों की पूजा की जाती है।

हिंदू धर्म के अनुसार, एक वर्ष में चार नवरात्रि होती है। वर्ष के प्रथम मास अर्थात चैत्र में प्रथम नवरात्रि होती है। चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्रि होती है। इसके बाद अश्विन मास में प्रमुख नवरात्रि होती है।

इसी प्रकार वर्ष के ग्यारहवें महीने अर्थात माघ में भी गुप्त नवरात्रि मनाने का उल्लेख एवं विधान देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।

अश्विन मास की नवरात्रि सबसे प्रमुख मानी जाती है। इस दौरान गरबों के माध्यम से माता की आराधना की जाती है। दूसरी प्रमुख नवरात्रि चैत्र मास की होती है। इन दोनों नवरात्रियों को क्रमश: शारदीय व वासंती नवरात्र के नाम से भी जाना जाता है। इन्हें प्रकट नवरात्रि भी कहते हैं।

इसके अतिरिक्त आषाढ़ तथा माघ मास की नवरात्रि गुप्त रहती है। इसके बारे में अधिक लोगों को जानकारी नहीं होती, इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्रि कहते हैं।कहा जाता है क शारदीय नवरात्रि धर्म की अधर्म पर और सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हीं नौ दिनों में मां दुर्गा धरती पर आती है और धरती को उनका मायका कहा जाता है. उनके आने की खुशी में इन दिनों को दुर्गा उत्सव के तौर पर देशभर में धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है।नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, भजन, पूजन, योग-साधना आदि करते हैं।

किसी भी व्रत एवं पूजा का सीधा संबंध हमारे खुद पर नियंत्रण करने से है।व्यक्ति का जितना खुद पर आत्म नियंत्रण होगा,सफलता उतनी ही सुनिश्चित होगी।व्रत का मतलब भूखा रहने से नहीं है। व्रत का तात्पर्य है स्वयं को हर बुराई से दूर रखना।अगर कोई व्यक्ति भूखा रहकर व्रत नहीं कर सकता तो वह अपने आपको कम से कम इन दिनों बुराई से दूर रखकर भी अपनी श्रद्धा अभिव्यक्त कर सकता है।समजोपयोगी कार्यों में अपना कीमती योगदान बनाए रखें,अपने से कमजोर के हितों की रक्षा करें, गौ माता की सेवा करें, ग्रास दें, विद्या दान दें।अपने आसपास साफ सफाई रखें और खुद को कभी किसी सोपान पर गिरने नहीं दें, तो आप सच्चे अर्थों में मां दुर्गा के श्री चरणों में अपना समर्पण कर पाएंगे और मां दुर्गा की सच्ची सेवा के हकदार बनेंगे।

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  • Web Title: Navratri 2022 | Why are the nine forms of Maa Durga invoked during the nine days of Navratri?

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