March 5, 2024

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क्या रालोद के पाले में जाएगी ये चर्चित सीट? चर्चा हुई तेज, मनीषा अहलावत बिजनौर में सक्रिय, लग शक्ति है लाटरी?

मनीषा अहलावत

मनीषा अहलावत

रालोद के एनडीए में शामिल होने से पश्चिमी यूपी की यह चर्चित लोकसभा सीट रालोद के पाले में जा सकती है। उधर, रालोद के विधायकों को लेकर ये बड़ी चर्चा चल रही है।

रालोद के एनडीए में शामिल होने के बाद बिजनौर लोकसभा सीट रालोद के पाले में जाने की संभावना है। यही नहीं यूपी में योगी आदित्यनाथ के मंत्री मंडल में रालोद विधायकों को भी शामिल किया जा सकता है। गठबंधन की घोषणा के साथ ही जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। विभिन्न दलों के नेता भी बिजनौर लोकसभा सीट को लेकर गणित निकालने में जुटे रहे।

वहीं, गठबंधन के बाद कई संभावित दावेदारों के अरमानों पर पानी फिरता दिख रहा है, क्योंकि ये पिछले काफी समय से चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए थे। मगर अब बिजनौर सीट पर कई नए चेहरे सामने आने लगे है जिनमे एक नाम मेरठ कैंट की पूर्व प्रत्याशी मनीषा अहलावत का भी नाम है। अब वो भी बिजनौर में पार्टी के विस्तार के नाम पर लोगो से संपर्क कर रही है। बिजनौर के लोगो का कहना है कि यदि मनीषा अहलावत को टिकट मिल जाता है तो उनकी जीत पक्की है। मगर टिकट मिलने की डगर कठिन है क्योकि बसपा के बिजनौर सीट से वर्तमान सांसद में टिकट वाली लाइन में लग गए है. कल ही उन्हें रालोद पार्टी के कार्यलय पर देखा गया है। उनका वहाँ जाना कोई सामान्य नहीं हो सकता।

वर्तमान में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कैराना, बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद समेत कई सीटों पर भाजपा काबिज है। विधानसभा 2022 के चुनाव में सपा-रालोद गठबंधन के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की शामली जिले की कैराना, शामली, थानाभवन सीट पर भाजपा जीत दर्ज नहीं कर सकी थी। तीनों सीटों पर गठबंधन प्रत्याशियों ने ही जीत दर्ज की थी। इसके बाद से भाजपा हाईकमान भी परेशान था। पिछले कई दिन से रालोद और भाजपा के गठबंधन की बात कही जा रही थी। आखिर सोमवार को रालोद एनडीए में शामिल हो गई।

गठबंधन के बाद रालोद को बागपत के अलावा बिजनौर लोकसभा सीट मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा एक राज्य सभा सीट के अलावा दो विधायकों को मंत्रालय दिए जाने की भी चर्चा है। माना जा रहा है कि गठबंधन के बाद बिजनौर लोकसभा सीट रालोद के खाते में जा सकती है। यदि बिजनौर लोकसभा सीट रालोद के खाते में जाती है तो चुनाव की तैयारी कर रहे कई भाजपा नेताओं के अरमानों पर पानी फिरेगा। हालांकि, रालोद को भी बिजनौर सीट मिलने से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, देर रात तक गठबंधन को लेकर स्थानीय रालोद और भाजपा के पदाधिकारी इनकार करते रहे। वहीं, सपा का कहना है कि रालोद के एनडीए में शामिल होने से संप्रदायिक सद्भाव व किसानों, मजदूरों के लिए संघर्ष करने वाले लाखों लोगों को निराशा हुई है। पिछले कई वर्षों से सपा-रालोद के कार्यकर्ता भाजपा की किसान-मजदूर विरोधी व सांप्रदायिक ध्रुवीकरण नीतियों के खिलाफ कंधे से कंधे मिलाकर चल रहे थे। सपा किसान मजदूरों के हितों और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को मजबूत करने के लिए ताकत के साथ संघर्ष करेगी।

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