DM बिटिया मेरी फरियाद सुनो : DM नेहा जैन ने बुजुर्ग महिला को गले लगाकर पोछे आँसू, सुनी व्यथा, दिए निस्तारण के आदेश

कानपुर देहात : भोगनीपुर तहसील के धौकलपुर गांव की 77 साल की एक वृद्ध महिला हाथ से लिखी एक चिट्ठी लेकर सोमवार को डीएम की चौखट पर पहुंची। डीएम बिटिया पति की मौत हो गई है, जमीन बेटे के नाम हो गई। अब एक एक रुपए को मोहताज हैं। बेटा रोटी तक नहीं देता, वृद्धा की शिकायत सुनकर डीएम कानपूर देहात नेहा जैन भावुक हो गईं। न्याय का आश्वासन देकर सरकारी गाड़ी से उन्हें घर भेजा।

डीएम बिटिया मेरी फरियाद सुनो

वृद्ध महिला का पत्र देखकर कुर्सी छोड़कर डीएम नेहा जैन बुजुर्ग महिला जो रोते हुए आई को गले लगाकर उन्होंने महिला के पोछे आँसू सुनी व्यथा, निस्तारण के आदेश देकर जल पान करा कर महिला को अपनी गाड़ी से घर भेजा। ये देख वहां मौजूद अन्य अफसर और फरियादी आश्चर्यचकित रह गए। जानिए उस चिट्ठी में ऐसा क्या था, जिसे पढ़कर डीएम ने कुर्सी छोड़ दी।

बेटे-बहू से परेशान 77 साल की कुसुम सिंह डीएम नेहा जैन के पास मदद के लिए पहुंची थीं। उन्होंने एक नोटबुक के पेज में अपनी हैंड राइटिंग से चिट्ठी लिखी थी। आम लोगों की तरह पत्र अधिकारियों को संबोधित करते हुए नहीं लिखा गया था। इसे भावनात्मक ढंग से जोड़ते हुए महिला ने प्रिय डीएम बिटिया से शुरू किया था। पत्र के अंत में महिला ने लिखा शुभकामनाओं सहित आपकी दादी मां।

बस यही सब पढ़कर डीएम भावुक हो गईं और उन्होंने तत्काल कुर्सी छोड़कर उसे गले लगा लिया। उनकी समस्या सुनीं। डीएम ने वृद्धा से खाना पानी के लिए भी पूछा इस पर उन्होंने कहा कि वह रोटी चटनी और पानी लेकर आई हैं, जिसे भूख लगने पर खा लेंगी। महिला से जब डीएम ने शिक्षा के बावत पूछा तो उन्होंने बताया कि वह कक्षा पांच पास हैं। पहले काफी समय तक पड़ोस के बच्चों को शिक्षित करने का प्रयास भी करती रहीं हैं, इसलिए लिखना पढ़ता बेहतर ढंग से आता है। फिलहाल महिला का आत्मविश्वास, राइटिंग देखकर डीएम और उनके अफसर तारीफ करते नजर आए।

महिला बोली बेटे-बहू नहीं दे रहे खाना

कुसुम सिंह ने डीएम नेहा जैन को बताया कि वर्ष 1981 में पति छविनाथ सिंह की कैंसर से मौत हो गई थी। वह कोलकाता में नौकरी करते थे। उनकी मौत के बाद जमीन बेटे के नाम आ गई। बेटे ने मां की देखभाल बंद कर दी। खाना पानी देना भी बंद कर दिया। वृद्धा अब एक-एक रुपये के लिए मोहताज है। वृद्धा को पता चला कि डीएम महिलाओं की बात बहुत गंभीरता से सुनती हैं और समस्या का निराकरण करती हैं। इसी उम्मीद में वह चिट्ठी में अपना दर्द लिखकर डीएम के पास आई थी।

डीएम ने सरकारी गाड़ी से एसडीएम के पास भेजा

महिला की बात सुनकर डीएम ने एसडीएम भोगनीपुर महेंद्र कुमार को फोन किया और बोलीं माता जी को सरकारी गाड़ी से तहसील भेज रही हूं। उनकी समस्या का निराकरण कराएं। इसके बाद वृद्ध महिला को सरकारी गाड़ी से एसडीएम के पास भेज दिया गया। महिला ने लेखपाल हरीराम पर आरोप लगाया कि गिरदौं गांव में उसकी कुछ जमीन है, जिसे वह उसके नाम दर्ज नहीं कर रहा है। अगर वह जमीन उसके नाम आ जाए तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ उसे मिल जाएगा।

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