March 5, 2024

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कोर्ट ने लक्ष्य को स्वीकारा.. बागपत में हिंदुओं को मिला 100 बीघे जमीन का मालिकाना हक

  • कोर्ट ने लक्ष्य को स्वीकारा..
  • बागपत में हिंदुओं को मिला 100 बीघे जमीन का मालिकाना हक, मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका..
  • शेख बदरुद्दीन की कब्र और कब्रिस्तान के अस्तित्व को कोर्ट ने नकारा..
  • 53 साल बाद आया फैसला

UP: क्या बागपत जिले में हिंडन और कृष्णा नदियों के संगम पर स्थित बरनावा गांव स्थित ऐतिहासिक टीला महाभारतकालीन लाक्षागृह है या शेख बदरुद्दीन की दरगाह और कब्रिस्तान? इसे लेकर 53 साल से कोर्ट में चल रहे मामले पर सोमवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा, ”बरनावा में कोई दरगाह नहीं है, यह लाक्षागृह की जमीन है और इसीलिए मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी गई.”

बरनावा निवासी मुकीम खान ने 1970 में मेरठ कोर्ट में दायर मुकदमे में लाक्षागृह गुरुकुल के संस्थापक ब्रह्मचारी कृष्णदत्त महाराज को प्रतिवादी बनाया था। इसमें मुकीम खान और कृष्णदत्त महाराज दोनों का निधन हो चुका है। दोनों पक्षों से अन्य लोग मामले की पैरवी कर रहे हैं. जिला अलग होने के बाद अब यह मामला सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम की अदालत में चल रहा था।

”मुकीम खान की ओर से मुकदमा दायर करते हुए दावा किया गया कि बरनावा में प्राचीन टीले पर शेख बदरुद्दीन की दरगाह और कब्रिस्तान है. यह सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड से पंजीकृत भी है. इसमें कहा गया था कि कृष्णदत्त महाराज बाहर था। वे आंध्र प्रदेश के निवासी हैं और वे कब्रिस्तान को नष्ट करके इसे हिंदुओं के तीर्थ स्थल में बदलना चाहते हैं।”

बरनावा के लाक्षागृह स्थित संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य आचार्य अरविंद कुमार शास्त्री का कहना है कि यह ऐतिहासिक टीला महाभारत काल का लाक्षागृह है। यहां की सुरंग और अन्य अवशेष इस बात का प्रमाण हैं। इसके सभी प्रमाण अधिकारियों ने दिए हैं। गांधी धाम समिति की, जो कोर्ट में वकालत कर रही थी।”

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