Button Mushroom : Button Mushroom ki kheti kaise kare in hindi

Button Mushroom ki kheti kaise kare in hindi

बटन मशरूम (button mushroom) उगाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के महीने में होता है, इन छ: महीनों में दो फसलें उगाई जाती हैं. बटन खुम्बी की फसल के लिए आरम्भ में 220-260 तापमान की आवश्यकता होती है, इस ताप पर कवक जाल बहुत तेजी से बढ़ता है बाद में इसके लिए 140-180 ताप ही उपयुक्त रहता है. इससे कम ताप पर फलनकाय की बढ़वार बहुत धीमी हो जाती है

मशरूम (mushroom) की डिमांड आजकल बढ़ती जा रही है। यह खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है। प्रकृति में हजारों तरह की मशरूम पाया जाता है। लेकिन सभी प्रकार के मशरूम खाने योग्य नहीं होते हैं। इन मशरूमों में बटन मशरूम की खेती (button mushroom ki kheti)भारत के कई राज्यों में होता है।

तो आइए इस लेख में हम बटन मशरूम की खेती(button mushroom ki kheti) को विस्तार से जानें। 

इस लेख में आप जानेंगे

  1. बटन मशरूम की खेती कैसे करें(button mushroom ki kheti kaise karen)
  2. बटन मशरूम की आवश्यक जलवायु
  3. button mushroom ki kheti के तरीके

बटन मशरूम मांसल और आकार में टोपीनुमा होता है। इस मशरूम की मांग बाजार में सबसे अधिक होती है। बटन मशरूम की खेती (Button mushroom ki kheti) भारत में सबसे ज्यादा की जाती है। एक अनुमान के अनुसार भारत में कुल मशरूम की खेती का 80% हिस्सा बटन मशरूम की खेती का है। उत्पादन की दृष्टि से बटन मशरूम का विश्व में प्रथम स्थान है।

भारत में मशरूम की खेती का प्रचलन दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. जैसे – जैसे मनुष्य मानसिक एवं आधुनिक युग की तरफ अग्रसर हो रहा है, वो अपने शरीर के लिए पोषक तत्व युक्त, गुणकारी, पाचनशील, स्वादिष्ट उपयोगी सब्जी भी अपने भोजन में लेना पसंद कर रहे है. मशरूम से हमारे शरीर को काफी मात्रा में प्रोटीन, खनिज-लवण, विटामिन बी, सी व डी मिलती है जो अन्य सब्जियों की तुलना में काफी ज्यादा होती है. इसमें मौजूद फोलिक अम्ल की उपलब्धता शरीर में रक्त बनाने में मदद करती है, इसका सेवन मनुष्य के रक्तचाप, हृदयरोग, में लाभकारी होता है.

Button Mushroom Ki Kheti: बटन मशरूम की खेती कैसे करें?

वैसे तो मशरूम की खेती कई जगह की जाती है लेकिन, यहां हम जानेंगे की कैसे किसान कम लागत में इसकी खेती करके ज्यादा मुनाफा कमा सकता है.

मशरूम की फसल की देखभाल कैसे करें

मशरूम की फसल की देखभाल की खास जरूरत होती है। मशरूम की फसल को हमेशा कमरे में ही करें। कमरा ऐसा होना चाहिए जहाँ रोशनी और हवा आने की पर्याप्त और समुचित व्यवस्था हो।

यदि प्रकाश कमरे में नहीं आ रही हो तो बल्ब लगा दें। समय-समय पर कंपोस्ट की नमी भी जाँचते रहे। नमी की मात्रा कभी कम नहीं होनी चाहिए अन्यथा फसल सूख सकती है। सुबह-शाम कुछ देर के लिए दरवाजे और खिड़कियाँ खोल दें।

बटन मशरूम उगाने का सही समय कौन सा है ?

बटन मशरूम उगाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के महीने में होता है, इन छ: महीनों में दो फसलें उगाई जाती हैं. बटन खुम्बी की फसल के लिए आरम्भ में 220-260 तापमान की आवश्यकता होती है, इस ताप पर कवक जाल बहुत तेजी से बढ़ता है बाद में इसके लिए 140-180 ताप ही उपयुक्त रहता है. इससे कम ताप पर फलनकाय की बढ़वार बहुत धीमी हो जाती है.

बटन मशरूम उगाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के महीने में होता है, इन छ: महीनों में दो फसलें उगाई जाती हैं. बटन खुम्बी की फसल के लिए आरम्भ में 220-260 तापमान की आवश्यकता होती है, इस ताप पर कवक जाल बहुत तेजी से बढ़ता है बाद में इसके लिए 140-180 ताप ही उपयुक्त रहता है. इससे कम ताप पर फलनकाय की बढ़वार बहुत धीमी हो जाती है.

बटन मशरूम उगाने के लिए कम्पोस्ट बनाने की विधि क्या है ?

बटन मशरूम की खेती एक विशेष प्रकार की खाद पर ही की जाती है जिसे कम्पोस्ट कहते हैं. मशरूम कम्पोस्ट तैयार करने के लिए किसी विशेष मूल्यवान मशीनरी या यन्त्र की जरूरत नही पड़ती है. कम्पोस्ट बनाने में निम्न प्रकार की सामग्री काम में ली जाती है:

  • गेहूं या चावल का भूसा 1000 किलोग्राम
  • अमोनियम सल्फेट
  • केल्शिम अमोनियम नाईट्रेट-27 किलोग्राम
  • सुपरफौसफेट-10 किलोग्राम
  • यूरिया-17 किलोग्राम
  • गेहूं का चोकर 100 किलोग्राम
  • जिप्सम 36 किलोग्राम.

कम्पोस्ट शेड में ही तैयार किया जाता है. कम्पोस्ट तैयार करने में करीब 28 दिन का समय लगता है. सबसे पहले समतल एवं साफ फर्श पर भूसे को 2 दिन तक पानी डाल कर गिला किया जाता है, इस अवस्था में भूसे में नमी 75 प्रतिशत होनी चाहिए और भूषा अधिक गिला नही होना चाहिए. 2 दिन तक पानी गिराने के बाद फिर भसे को तोड़ कर देखें भूसा अन्दर से सुखा न हो तो ठीक अन्यथा सुखा हो तो फिर से पानी मिलाएं. इस गीले भूसे में जिप्सम के अलावा सारी सामग्री को मिला कर उसे थोड़ा और गिला करें. इस बात का ध्यान रखें की पानी उसमे से बाहर न निकले फिर भूसे से एक मीटर चौड़ा एवं तीन मीटर तक लम्बा (लम्बाई कम्पोस्ट की मात्रा के अनुसार) और करीब डेढ़ मीटर ऊंचा चौकोर ढ़ेर बना लें. ढ़ेर को 2-3 दिन तक ऐसे ही पड़ा रहने दें. 3 दिन बाद ढ़ेर की पलटी शुरू करें, एवं ध्यान रखें की ढ़ेर का अन्दर का हिस्सा बाहर और बाहर का हिस्सा अन्दर आ जाए. पलटाई करने का विवरण निम्न सारणी में दिया गया है

दिवस पलटाई विवरण क्या है ?

  • दूसरा दिन- भूसे को गिला करना, जिप्सम को छोड़कर सारी सामग्री मिलकर पानी छिड़क कर उसका ढ़ेर बना लें.
  • तीसरा दिन- पहली पलटाईःढेर को इस तरह तोड़े की ऊपर का हिस्सा निचे और निचे का हिस्सा ऊपर हो जाए. इस पर लिंडेन छिड़क दें ताकि मक्खियां न बैठे और आसपास फोर्मलिन 6 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें.
  • छठे दिन- दूसरी पलटाईः ढेर की दूसरी बार पलटाई करें.
  • नौवां दिन- तीसरी पलटाई: जिप्सम को मिलकर पलटाई करें एवं पुनः ढ़ेर बना दें.
  • बारहवा दिन- चौथी पलटाईः पलटाई करके फोर्मलिन 6 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें.
  • पन्द्रहवां दिन- पांचवी पलटाई
  • अठारवा दिन- छटी पलटाईःआस पास फोर्मलिन 4 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें.
  • इक्कीसवें दिन- सातवीं पलटाई करें और साथ ही कम्पोस्ट को सूंघ कर देखें यदि अमोनिया की गंध आ रही हो तो पलटाई ठीक से करें.
  • चौबीसवां दिन- आठवीं पलटाईः इस पलटाई में अमोनिया की गंध बिलकुल नहीं होनी चाहिए और यदि है तो एक बार और एक दिन बाद फिर से पलटाई करें नहीं तो पैदावार कम और प्रभावित होती है.
  • सत्ताईसवां दिन- कम्पोस्ट खाद बीज मिलाने(स्पानिंग) के लिए तैयार है.

कम्पोस्ट में नमी की मात्रा देखने के लिए उसे मुट्ठी में ले कर दबाएं, यदि थोड़ा पानी उंगलियों के बीच नजर आये तो उपयुक्त है. यदि अधिक पानी रह गया है तो कम्पोस्ट को थोड़ा फैला दें जिससे अतिरिक्त नमी उड़ जाए.

मशरूम के बीज की बीजाई कैसे करे ?

मशरूम का बीज ताजा, पूरी बढ़वार लिए एवं अन्य फफूंद से मुक्त होना चाहिए. बीज की मात्रा एक क्विंटल कम्पोस्ट में .75 से 1 किलोग्राम होनी चाहिए. इस बीज को कम्पोस्ट में अच्छी तरह मिलाकर या तो पोलीथिन की थैलियों (12 इंच) या पोलीथिन शीट (6-8 इंच) पर शेल्फ में भर दें. पोलीथिन की थैलियों को ऊपर से मोड़ कर बंद कर देना चहिए जबकि शेल्फ पर अखबार ढ़क देना चाहिए. थैलियां 8 किलोग्राम कम्पोस्ट भरने के लिए उपयूक्त हो, इससे उत्पादन 10 किलोग्राम कम्पोस्ट के बराबर मिलता है. इस समय कमरे का ताप 250 से कम एंव नमी 70 प्रतिशत रखनी चाहिए. करीब 15 दिन बाद स्पान रन पूरा हो जाता है और उसके बाद केसिंग की आवश्यकता होती है.

मशरूम केसिंग कैसे करे ?

  1. केसिंग मिट्टी के लिए उपयुक्त मिश्रण इस प्रकार है :-
  2. बगीचे की खाद (ऍफ वाई एम) दोमट मिट्टी (1:1)
  3. ऍफ वाई एम 2 साल पुरानी बटन मशरूम की खाद (1:1)
  4. ऍफ वाई एम दोमट मिट्टी रेती दो साल पुरानी बटन मशरूम की खाद (1:1:1)

उपरोक्त किसी भी एक मिश्रण को लें परन्तु मिश्रण-2 सर्वाधिक उपयुक्त एंव अधिक उपज देने वाला है. 8 घंटे तक पानी में भिगोना आवश्यक है. करीब 8 घंटे बाद पानी से निकालकर और सुखा कर केसिंग मिट्टी का निर्जीवीकरण फोर्मेलिन 6 प्रतिशत के घोल से करना चाहिए एवं उसे 48 घंटे तक बंद रखना चाहिए. उसके बाद इसे खोल कर 24 घंटे फैला कर रखें ताकि मिश्रण सूख जाए एवं स्पान रन कम्पोस्ट पर एक इंची मोटी परत इस केसिंग मिट्टी की लगनी चाहिए एवं पानी इस तरह छिडके की केवल केसिंग ही गीली हो. कमरे का तापमान 200 से कम एवं नमी 70-90 प्रतिशत के बीच होनी चाहिये साथ ही स्वच्छ हवा का आगमन होना चाहिए. केसिंग करने के लगभग 10-12 दिन के पश्चात इसमें छोटे छोटे मशरूम के अंकुरण बनने शुरू हो जाते हैं. इस समय से केसिंग पर 0.3 प्रतिशत कैल्सियम क्लोराइड का छिड़काव दिन में दो बार पानी के साथ जरूर करना चाहिए, जिससे मशरूम अगले 5-7 दिनों में बढ़कर पूरा आकर ले लेते हैं. इन्हें घुमाकर तोड़ लेना चाहिए, तोड़ने के बाद नीचे की मीती लगे तने के भाग को चाकू से काटकर अलग कर दें. एक बार केसिंग लगाने से ले कर करीब 80 दिन तक फसल प्राप्त होती रहती है.

मशरूम मूल्य संवर्धन की पूरी जानकारी

मशरूम तोड़ने के बाद, आकार के अनुशार उनकी छटनी कर लें तथा 3 प्रतिशत कैल्शियम क्लोराइड घोल से धोकर उसे फिर साफ पानी से धोएं. इसे कपड़े पर फैला दें ताकि अतिरिक्त पानी सूख जाए फिर 250 ग्राम, 500 ग्राम के पैकेट बना कर सील कर दें एवं थैलियों में थोड़े कर दें और इसे रेफ्रीजिरेटर में 7-8 दिन तक रख सकते हैं. ताजा मशरूम भी बाजार में आसानी से बिक जाती है. मशरूम के अनेक उत्पाद जैसे आचार, चिप्स, बिस्कुट, सूप पाउडर, बढ़ियां, एवं नूडल्स आदि बना कर भी बेचा जा सकता है.

बटन मशरूम की खेती (button mushroom ki kheti) में कमाई और लागत

किसान साथियों यह प्रश्न सबके मन में और सबसे पहले आता है कि बटन मशरूम की खेती (button mushroom ki kheti) में कितना लागत और कमाई होती है। तो आपको बता दें, बटन मशरूम उत्पादन में अन्य खेती की तुलना बेहतर कमाई हो जाती है।

एक किलो ग्राम उत्पादन में किसानों को 25-30 रूपए की खर्च आता है जबकि 40-50 रूपए तक कमाई हो जाती है।

आपको बता दें, पिछले कुछ वर्षों में मशरूम की खेती (mushroom ki kheti) की तरफ तेजी से रूझान बढ़ा है, मशरूम की खेती बेहतर आमदनी का जरिया बन सकता है।

अब तो आप समझ ही गए होंगे कि मशरूम की खेती एक आकर्षक व्यवसाय है। जिसमें बटन मशरूम की खेती (mushroom farming) एक अच्छा विकल्प है।

मशरूम खाने के फायदे

मशरूम (mushroom) में कई पौष्टिक तत्व होते  हैं जो हमारे शरीर को स्वस्थ बनाने है। इसमें विटामिन, आयरन, कैल्सियम, फास्फोरस जैसे कई तत्व पाए जाते हैं। शाकाहारियों के लिए मांस की सभी पोषक तत्वों की पूर्ती करती है। मशरूम में विटामिन डी पाया जाता है, जो हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूती देती है। मशरुम का उपयोग करने से हमारे शरीर की इम्यूनिटी भी भी बढ़ती है। 

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